आयकर अधिनियम 2025 की मुख्य बातें: नया बनाम पुराना कर शासन – किसे चुनें?

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नए आयकर विधेयक 2025 की प्रमुख विशेषताएँ क्या हैं?

भारत के आयकर अधिनियम 2025 की प्रमुख विशेषताओं का एक सारांश (नवीनतम अपडेट के आधार पर):

नए आयकर अधिनियम 2025 की मुख्य बातें

1. अगस्त 2025 में कानून बना, 1 अप्रैल 2026 से लागू

  • संशोधित आयकर (संख्या 2) विधेयक, 2025 को 11 अगस्त 2025 को लोकसभा में पेश किया गया, दोनों सदनों से पारित हुआ और 21 अगस्त 2025 को राष्ट्रपति की मंजूरी मिली।
  • यह नया अधिनियम 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगा।

2. सरल संरचना और भाषा

  • वर्तमान 819+ धाराओं को घटाकर 536 धाराओं, 23 अध्यायों और 16 अनुसूचियों में समाहित किया गया है, कुल लगभग 622 पन्नों का अधिनियम।
  • भाषा को सरल बनाया गया है – कानूनी गूढ़ शब्दों की जगह तालिकाओं, सूत्रों और आसान शब्दों का प्रयोग।

3. “कर वर्षकी एकीकृत अवधारणा

  • पहले के “पिछला वर्ष + आकलन वर्ष” की दोहरी अवधारणा की जगह अब केवल “कर वर्ष” होगा (1 अप्रैल से 31 मार्च)।
  • नए व्यवसाय या पेशे के लिए कर वर्ष स्थापना की तारीख से शुरू होगा।

4. कर संरचना दरों में कोई बदलाव नहीं

  • 2025-26 के बजट में घोषित दरें ही लागू रहेंगी।
  • नया कर शासन (डिफ़ॉल्ट) रहेगा, साथ ही पुराना शासन चुनने का विकल्प भी।

5. ₹12 लाख तक कर छूट

  • ₹12 लाख वार्षिक आय तक पूर्ण छूट।
  • ₹75,000 मानक कटौती जोड़ने पर प्रभावी छूट सीमा ₹12.75 लाख हो जाती है।

6. डिजिटलप्रथम और फेसलेस प्रक्रिया

  • कर निर्धारण पूरी तरह डिजिटल और फेसलेस होगा, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी।
  • CBDT को नियम बनाने, सर्कुलर जारी करने और टेक्नोलॉजी आधारित सुधार लागू करने की अधिक शक्ति मिलेगी।

7. रिफंड और प्रवर्तन में करदाताओं के अनुकूल बदलाव

  • ITR की समयसीमा के बाद भी TDS रिफंड बिना पेनाल्टी के जारी हो सकते हैं।
  • प्रवर्तन कार्यवाही से पहले नोटिस देना अनिवार्य।

8. करदाता चार्टर लागू

  • इसमें करदाताओं के अधिकार और दायित्व स्पष्ट रूप से बताए गए हैं।

9. वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (VDA) पर प्रावधान

  • क्रिप्टोकरेंसी और NFT को स्पष्ट रूप से परिभाषित कर कैपिटल गेन नियमों के तहत कर योग्य बनाया गया है।
  • इन्हें “अघोषित आय” की परिभाषा में शामिल किया गया है।

10. विशेष स्पष्टीकरण समेकन

  • पूंजीगत लाभ (Capital Gains) को स्पष्ट किया गया है (लघु अवधि बनाम दीर्घ अवधि)।
  • वेतन से जुड़ी कटौतियाँ (मानक कटौती, ग्रेच्युटी, अवकाश नकदीकरण), पूंजीगत लाभ संबंधी कटौतियाँ आदि को समेकित किया गया है।
  • धार्मिक ट्रस्टों को गुमनाम दान पर प्रतिबंध (सामाजिक सेवा में शामिल न होने पर)।

11. चयन समिति की समीक्षा

  • 285 से अधिक सिफारिशें अपनाई गईं, जिनमें ₹12 लाख की छूट, नई संरचना और फेसलेस असेसमेंट शामिल हैं।

आयकर अधिनियम 2025 भारत की कर प्रणाली के आधुनिकीकरण की दिशा में बड़ा कदम है – सरल भाषा, “कर वर्ष” की नई अवधारणा, करदाता अधिकारों का संहिताकरण, डिजिटल असेसमेंट और पारदर्शिता, साथ ही मध्यम वर्ग को राहत।

पुराने और नए कर शासन (Regime) में क्या अंतर है?

1. कर स्लैब और दरें

पुराना कर शासन (अब भी वैकल्पिक):

  • छूट सीमा कम, लेकिन कई कटौतियाँ/छूट उपलब्ध।
  • स्लैब:
    • ₹0 – ₹2.5 लाख → शून्य
    • ₹2.5 – ₹5 लाख → 5%
    • ₹5 – ₹10 लाख → 20%
    • ₹10 लाख से ऊपर → 30%

नया कर शासन (डिफ़ॉल्ट, 2023-24 से):

  • छूट सीमा अधिक, दरें कम, पर ज़्यादातर कटौतियाँ उपलब्ध नहीं।
  • स्लैब (बजट 2025-26 के अनुसार):
    • ₹0 – ₹4 लाख → शून्य
    • ₹4 – ₹8 लाख → 5%
    • ₹8 – ₹12 लाख → 10%
    • ₹12 – ₹16 लाख → 15%
    • ₹16 – ₹20 लाख → 20%
    • ₹20 – ₹24 लाख → 25%
    • ₹24 लाख से ऊपर → 30%

2. कटौतियाँ और छूट

प्रावधानपुराना शासननया शासन
मानक कटौती ₹75,000
धारा 80C (LIC, PF, ELSS आदि) ₹1.5 लाख तक
80D (हेल्थ इंश्योरेंस)
80CCD(1B) NPS ₹50,000
80G (दान)
HRA, LTA, होम लोन ब्याज❌ (सिर्फ किराए पर दी गई संपत्ति पर ब्याज समायोजन)
नियोक्ता का NPS योगदान
पारिवारिक पेंशन कटौती ₹15,000

3. छूट सीमा

  • पुराना शासन: ₹5 लाख तक कर-मुक्त (सेक्शन 87A रिबेट के कारण)।
  • नया शासन (2025): ₹12 लाख तक कर-मुक्त (₹12.75 लाख मानक कटौती सहित)।

4. लचीलापन

  • पुराना शासन → उन लोगों के लिए बेहतर जो निवेश और कटौतियाँ लेते हैं।
  • नया शासन → सरल और उन लोगों के लिए बेहतर जो निवेश नहीं करना चाहते।

5. कौन सा बेहतर है?

  • पुराना शासन चुनें यदि: आप 80C/80D/NPS/होम लोन/HRA आदि में भारी निवेश/कटौतियाँ लेते हैं।
  • नया शासन चुनें यदि: आपके पास कम निवेश हैं और आप सरलता चाहते हैं।

क्या आप ITR भरते समय कर शासन बदल सकते हैं?

1. वेतनभोगी (सैलरी वाले) व्यक्ति:

  • हर साल ITR भरते समय पुराना/नया शासन चुन सकते हैं।
  • भले ही नियोक्ता को साल भर नया शासन बताया हो, ITR भरते समय पुराना शासन चुन सकते हैं।

2. व्यवसाय/पेशेवर आय वाले:

  • नया शासन चुन सकते हैं, पर यदि बाद में बाहर निकल गए तो वापस आना मुश्किल (सिर्फ एक बार जीवन में, जब व्यवसाय आय न हो)।

3. ITR प्रक्रिया में:

  • फॉर्म में कर शासन चुनने का विकल्प होगा।
  • नया शासन चुनने पर फ़ॉर्म 10-IEA भरना होगा (व्यवसाय वालों के लिए)।

किसे चुनें – पुराना या नया शासन?

  • कम कटौतियाँ वाले सैलरीभोगी → नया शासन बेहतर।
  • भारी निवेश, गृह ऋण या कई छूट लेने वाले → पुराना शासन बेहतर।
  • सर्वश्रेष्ठ तरीका → ITR भरने से पहले दोनों की गणना करें और जो कम कर देता हो वही चुनें।
यहाँ आयकर की गणना करें

Income Tax Comparison Calculator (2025-26)





निष्कर्ष

आयकर अधिनियम 2025 भारत की कर प्रणाली में बड़ा सुधार है – सरल अनुपालन, “कर वर्ष” की अवधारणा, करदाता अधिकार, डिजिटल आकलन और आधुनिक भाषा। नए शासन में ₹12 लाख तक की छूट से मध्यम वर्ग को बड़ी राहत मिलेगी, जबकि अधिक निवेश/कटौतियाँ लेने वालों को पुराना शासन लाभदायक रह सकता है। करदाताओं को चाहिए कि हर साल दोनों व्यवस्थाओं की तुलना करें और जो भी कर बचाए वही चुनें।

Frequently Asked Questions (FAQ)

1. आयकर अधिनियम 2025 कब लागू होगा?

उत्तर: आयकर अधिनियम 2025, 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगा और इसी से “कर वर्ष” की नई अवधारणा लागू होगी।

2. नए कर शासन (New Regime) में कितनी आय तक कर छूट मिलेगी?

उत्तर: नए कर शासन में ₹12 लाख तक की आय पूरी तरह कर मुक्त है। मानक कटौती (₹75,000) जोड़ने पर प्रभावी छूट ₹12.75 लाख तक हो जाती है।

3. क्या पुराने और नए कर शासन (Old vs New Regime) में से हर साल चुनाव कर सकते हैं?

उत्तर: हाँ, वेतनभोगी (salaried) लोग हर साल ITR भरते समय पुराना या नया शासन चुन सकते हैं। लेकिन व्यवसाय/प्रोफेशनल आय वालों के लिए विकल्प सीमित है।

4. कौन सा कर शासन बेहतर है – पुराना या नया?

उत्तर: यदि आप भारी निवेश/कटौतियाँ लेते हैं (जैसे 80C, 80D, होम लोन), तो पुराना शासन लाभदायक है। यदि आपके पास कम निवेश हैं, तो नया शासन सरल और फायदेमंद है।

5. क्या नया आयकर अधिनियम 2025 कर प्रक्रिया को आसान बनाएगा?

उत्तर: हाँ, नया अधिनियम सरल भाषा, डिजिटल फेसलेस असेसमेंट, करदाता अधिकार चार्टर और आधुनिक नियमों के साथ कर प्रक्रिया को पारदर्शी और आसान बनाएगा।

6. क्या क्रिप्टो और NFT पर भी टैक्स लगेगा?

उत्तर: जी हाँ, वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (VDA) जैसे क्रिप्टो और NFT को कैपिटल गेन टैक्स के अंतर्गत लाया गया है और इन्हें “अघोषित आय” की श्रेणी में भी माना जाएगा।

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